अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते हुए सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर पांच फ़ीसदी तक बढ़ने का अनुमान जताया है. पिछले वित्तीय वर्ष में इसकी विकास दर 6.8 फीसदी थी. इससे पहले आरबीआई ने भी देश की विकास दर के अपने अनुमान को घटाकर पांच फीसदी कर दिया था.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने मंगलवार को चालू वित्तीय वर्ष के लिए जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया. बीते कई महीनों से अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती के चलते यह विकास दर पांच फ़ीसदी तक पहुंचने को लेकर भी विशेषज्ञ बहुत सहमत नहीं हैं.
अर्थव्यवस्था के विकास की दर लगातार नीचे गिर रही है. खाने-पीने की चीज़ें महंगी हो रही हैं. पेट्रोल-डीजल की क़ीमतें भी बढ़ी हैं और इसकी खपत कम हो रही है.
बीते साल में महंगाई बेतहाशा बढ़ी है. लेकिन सरकार इसे नियंत्रित नहीं कर पा रही है. सरकार का कहना है कि चीज़ों की खपत कम हो रही है, लेकिन खपत कम होने की वजह क्या है और अगर यही हाल रहा तो क्या सरकार विकास दर के पांच फ़ीसदी के अनुमानित आंकड़े को छू पाएगी?
इस सवाल पर अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार कहते हैं, ''जो आंकड़े आते हैं वो एक तरह का अनुमान होता है कि ये कि विकास दर कितनी हो सकती है. लेकिन इसका आधार संगठित क्षेत्र के आंकड़ों होते हैं उसमें असंगठित क्षेत्र के आंकड़े नहीं होते.